नवादा जिले के डोहरा गांव निवासी विशाल ने लगातार असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। सेना में अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (SSB) की चयन प्रक्रिया में एक-दो नहीं, बल्कि 10 बार प्रयास किया। हर प्रयास में असफलता के बाद उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और उनमें सुधार करते हुए अगली कोशिश जारी रखी।

लगातार 10 असफलताओं के बावजूद विशाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी तैयारी को बेहतर किया और आत्मविश्वास के साथ 11वीं बार SSB की चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। इस बार उन्हें सफलता मिली और वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद के लिए चयनित हुए।

चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) की पासिंग आउट परेड में उनके परिवार के लिए यह उपलब्धि भावुक क्षण लेकर आई। समारोह के दौरान भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर सेवा दे चुके उनके पिता धनंजय कुमार धीरज ने अधिकारी बने बेटे को सैन्य परंपरा के अनुरूप सलामी दी।

पिता की सलामी के बाद विशाल ने झुककर उनके चरण स्पर्श किए और आशीर्वाद लिया। वर्षों की मेहनत और लगातार प्रयास के बाद बेटे को सैन्य अधिकारी के रूप में देखकर पिता भी भावुक हो उठे। यह क्षण पिता-पुत्र के लिए विशेष और यादगार बन गया।

विशाल की सफलता इस बात का उदाहरण है कि किसी लक्ष्य की राह में आने वाली असफलताएं अंतिम परिणाम तय नहीं करतीं। दस बार मिली असफलता के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और 11वें प्रयास में सफलता हासिल कर अपने सैन्य अधिकारी बनने के लक्ष्य को पूरा किया।

विशाल की इस उपलब्धि ने परिवार के उस सपने को भी पूरा किया, जिसे उनके पिता लंबे समय से संजोए हुए थे। उनकी कहानी निरंतर प्रयास, आत्ममूल्यांकन और दृढ़ संकल्प के जरिए लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा देती है।