देश से भागकर विदेशों में छिपने वाले अपराधियों के खिलाफ अब भारत की कार्रवाई सिर्फ कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर सुनियोजित अभियान का रूप ले चुकी है। भगोड़े अपराधियों की वापसी को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है। यही वजह है कि साल 2019 से 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। जहां पहले प्रत्यर्पण की प्रक्रिया वर्षों तक फाइलों में अटकी रहती थी।

वहीं अब खुफिया समन्वय, तकनीक और कूटनीतिक प्रयासों के दम पर कार्रवाई तेज हुई है। मोदी सरकार ने NIA और UAPA जैसे कानूनों में संशोधन किए, तीन नए आपराधिक कानून लागू किए और पहली बार BNSS में ट्रायल इन एब्सेंटिया का प्रावधान जोड़ा ताकि विदेश में छिपे अपराधी भी कानून की पकड़ से बच न सकें। सरकार ने BHARATPOL जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए 1,400 से अधिक एजेंसियों को इंटरपोल नेटवर्क से जोड़ा, जिससे सूचनाओं के आदान-प्रदान का समय घटकर कुछ ही दिनों में सिमट गया।

गृह मंत्रालय के मुताबिक पिछले तीन सालों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए, जबकि ऑपरेशन त्रिशूल के जरिए सैटेलाइट, डिजिटल फुटप्रिंट और जियो-लोकेशन तकनीक से पहचान बदलकर छिपे अपराधियों का भी पता लगाया गया। सिर्फ गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी सख्ती दिखाई गई है। साल 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों की करीब 17 हजार 874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई और 18 हजार 762 करोड़ रुपये की राशि की सफल वापसी सुनिश्चित की गई है। सरकार का कहना है कि यह अभियान केवल भगोड़ों को वापस लाने का नहीं, बल्कि कानून के राज, राष्ट्रीय सुरक्षा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के संकल्प का भी प्रतीक है।