रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास परिषद, डीआरडीओ और उद्योग जगत के बीच साझेदारी को और मजबूत किया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में DRDO-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट ‘विमर्श’ के दौरान अहम पॉलिसी पहल की घोषणा की। इन पहलों में MSME और डीप-टेक स्टार्ट-अप के लिए तकनीकी और वित्तीय एंट्री बैरियर को कम करने के लिए एक व्यापक फ़्रेमवर्क शामिल है। जिसमें डायरेक्ट फंडिंग, इनक्यूबेशन सपोर्ट और DRDO टेस्टिंग सुविधाओं तक खास एक्सेस की सुविधा दी जाएगी। साथ ही डीआरडीओ द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को लाइसेंसधारी उद्योगों के साथ सुरक्षित तरीके से साझा करने के लिए मानकीकृत रूपरेखा भी शुरू की गई है।

इस पहल के तहत कमर्शियल प्रोडक्शन को मजबूत करने के लिए 13 मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (LAToT) के लिए नौ लाइसेंसिंग एग्रीमेंट सौंपे गए। इंडस्ट्री की पहुंच बढ़ाने और ज़मीनी स्तर पर भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सोसाइटी ऑफ़ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) और लघु उद्योग भारती (LUB) के साथ रणनीतिक MoU का भी आदान-प्रदान किया गया। इस दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को केवल रक्षा उपकरणों का बड़ा बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा उत्पादन केंद्र बनाना है। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व सुधारों का भी ज़िक्र किया।