5 अगस्त 2020, यानी आज से ठीक छह साल पहले, अयोध्या में इतिहास रचने की शुरुआत हुई थी। लंबी कानूनी जंग के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण कार्य की शुरुआत की थी।
ये वही जन्मभूमि है, जो सनातनी मान्यताओं, ग्रंथों और कथाओं में जीवंत है। ये वही भूमि है, जहां त्रेता युग में प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था — चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर। सरयू तट के किनारे अवस्थित अयोध्या नगरी में।
त्रेता से लेकर 16वीं सदी तक प्रभु श्रीराम और उनके प्रति आस्था रखने वालों का प्रमुख केंद्र बना रहा। लेकिन 1528 ईस्वी में मुगल बादशाह बाबर द्वारा जन्मभूमि पर मंदिर के स्थान पर मस्जिद का निर्माण करवाया गया। श्रद्धालुओं के बीच प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था तो बरकरार रही, लेकिन वे अपने आराध्य के पूजन-अर्चन से वंचित रहे।
संघर्षों का दौर शुरू हुआ। गुलामी की सदियां भी बीतती रहीं। साल 1949 से कानूनी लड़ाई शुरू हुई। दशकों बाद साल 2019 में 9 नवंबर को उच्चतम न्यायालय की 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने जन्मभूमि का मालिकाना हक हिंदुओं को सौंप दिया। 500 साल का संघर्ष खत्म हुआ और 5 अगस्त 2020 इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी। 22 जनवरी 2024 को मंदिर का लोकार्पण भी किया गया।
