जुलाई 24, नई दिल्ली:

 अमेरिका और सऊदी अरब ने अपने रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए ऐतिहासिक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के साथ दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग का रास्ता खुल गया है। साथ ही अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के महत्वाकांक्षी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में भागीदारी का अवसर मिलेगा।

वॉशिंगटन में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने तथाकथित “123 एग्रीमेंट” और द्विपक्षीय परमाणु सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब के उभरते नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में तकनीक, उपकरण और विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकेंगी। समझौते के साथ हुए सुरक्षा प्रावधानों में दोनों देशों ने परमाणु सुरक्षा, परमाणु संरक्षा और परमाणु अप्रसार के उच्चतम मानकों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है।

अमेरिकी कानून के तहत किसी भी देश के साथ महत्वपूर्ण असैन्य परमाणु सहयोग शुरू करने से पहले “सेक्शन-123 एग्रीमेंट” अनिवार्य होता है। यही समझौता परमाणु तकनीक, उपकरणों के हस्तांतरण और सहयोग के लिए कानूनी तथा अप्रसार संबंधी ढांचा तय करता है। अब इस समझौते को अंतिम मंजूरी के लिए अमेरिकी कांग्रेस के पास भेजा जाएगा। यदि कांग्रेस की मंजूरी मिल जाती है तो यह समझौता अमेरिका और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा, रणनीतिक सहयोग और परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।