जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने रविवार को मझौली स्थित बड़ादेव देवालय और आदिवासी समाज के लिए 40.96 लाख की लागत से निर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने मंच से कहा कि सामुदायिक भवन बनाने में विधायक अजय विश्नोई का सबसे बड़ा योगदान है। साथ ही बड़ादेव देवालय के अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए 25 लाख रुपए देने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा की मप्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सभी आदिवासी देवालयो के जीर्णोद्धार के लिए 4 करोड़ की राशि स्वीकृति की है। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की।
मंत्री श्री शाह ने कहा कि अब बड़ादेव देवालय परिसर में प्रतिवर्ष आदिवासी मेले का आयोजन होगा, जिसके लिए जनजातीय कार्य विभाग हर साल 15 लाख रुपए की सहायता देगा, शेष व्यवस्थाएं स्थानीय विधायक और समाजजन मिलकर करेंगे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि सरकार जनजातीय समाज के छात्र-छात्राओं की शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के लिए लगातार योजनाएं बनाई है। आदिवासी समाज में वकील और जज बनने के लिए भी क्लेट परीक्षा की तैयारी भी की जाएगी। इसके अलावा यूपीएससी पीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी सरकार द्वारा करवाई जाएगी। साथ ही जो आदिवासी बच्चे डॉक्टर, या आईआईटी, ट्रिपलआईटी की तैयारी करना चाहते है उनके लिए जबलपुर, इंदौर, भोपाल में निशुल्क तैयारी सरकार द्वारा करवाई जाएगी।
मंत्री श्री शाह ने कहा कि जो आदिवासी भाई-बहन व्यापार करना चाहते हैं उनके लिए सरकार द्वारा 2 से 5 लाख रूपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जायेगा। साथ ही उन्हें व्यापार का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के 11 युवाओं का अग्निवीर में चयन होने पर सम्मान किया गया। साथ ही उन्होंने अपनी ओर से सभी चयनित युवाओं को 5-5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। मंत्री श्री शाह ने कहा कि आदिवासी युवाओं को अग्निवीर भर्ती की तैयारी कराने के लिए विशेष प्रशिक्षण योजना बनाई जाएगी। यदि सेना की ओर से प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है तो प्रशिक्षण अवधि के दौरान युवाओं के भोजन और अन्य आवश्यक खर्च जनजातीय कार्य विभाग द्वारा वहन किए जाएंगे। उन्होंने घोषणा की कि स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले वीर शंकर शाह और रघुनाथ शाह की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उनके जीवन और योगदान को पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाएगा। साथ ही उनके नाम पर जबलपुर में प्रतिवर्ष एक भव्य जनजातीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए 5 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस आयोजन में जनजातीय समाज के अन्य स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों को भी याद किया जाएगा।
मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए जबलपुर में भी एक सांस्कृतिक संरक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा। लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस केंद्र में आदिवासी युवक-युवतियों तथा महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा और पारंपरिक संस्कृति, कला एवं लोक परंपराओं को संरक्षित करने का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जनजातीय समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

