नीति आयोग की नई रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे देशों की तुलना में काफी धीमी है। 2030 तक 30% EV बिक्री का लक्ष्य मुश्किल नजर आ रहा है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी जरूर हो रही है, लेकिन इसकी रफ्तार अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन जैसे देशों के मुकाबले काफी धीमी है। नीति आयोग की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2024 में कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी सिर्फ 7.6 प्रतिशत रही, जो कि 2030 तक 30 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी पीछे है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने EV बिक्री में 2016 में 50,000 यूनिट्स से बढ़कर 2024 में 28 लाख यूनिट्स तक का सफर तय किया है। हालांकि, वैश्विक EV बिक्री इस दौरान 9.18 लाख से बढ़कर 1.87 करोड़ यूनिट्स तक पहुंच गई। यानी भारत को अगले 5 साल में EV हिस्सेदारी में 22 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी करनी होगी।
ईवी अपनाने में असंतुलन
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इलेक्ट्रिक कारों, बसों और लंबी दूरी के ट्रकों की बिक्री काफी धीमी है। खासकर लॉन्ग हॉल ट्रकों में तो EV अपनाने की शुरुआत भी नहीं हो पाई है।
नीति आयोग का रोडमैप
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अब EV अपनाने को प्रोत्साहन से आगे बढ़ाकर इसे अनिवार्य किया जाए। पांच प्रमुख शहरों में बसों, पैरा-ट्रांजिट और मालवाहक वाहनों के शहरी बेड़े को इलेक्ट्रिक बनाने की योजना बनाई गई है, जिससे एक बड़ा उदाहरण पेश किया जा सके।
नीति आयोग ने EV बसों और ट्रकों के लिए पूंजी लागत की चुनौती को कम करने के लिए मल्टीलेटरल समर्थन से एक फंड बनाने का प्रस्ताव भी दिया है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल टाइम एप की सिफारिश
देशभर के 20 हाई-डेंसिटी फ्रेट कॉरिडोर पर मजबूत EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और एकीकृत नेशनल ईवी चार्जिंग एप विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ईवी चार्जर तो उपलब्ध हैं लेकिन उपयोगिता कम है क्योंकि उनकी लोकेशन प्लानिंग और जागरूकता कमजोर है।
ICE वाहनों के लिए डिसइन्सेंटिव की तैयारी
नीति आयोग ने आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों को हतोत्साहित करने के लिए सख्त CAFE नॉर्म्स, बैटरी लीजिंग और EV पावर लाइन्स जैसे रेगुलेटरी उपायों की सिफारिश की है। साथ ही छोटे ऑपरेटरों को प्राथमिकता सेक्टर लेंडिंग और जोखिम न्यूनीकरण के जरिए समर्थन देने की बात भी कही गई है।
राष्ट्रीय ईवी ट्रांजिशन नीति की मांग
रिपोर्ट में एक स्पष्ट टाइमलाइन के साथ राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन ट्रांजिशन नीति बनाने की सिफारिश की गई है। इसमें 5 शहरों में 100 प्रतिशत शहरी ट्रांसपोर्ट को इलेक्ट्रिक बनाने और एक इंटर-मिनिस्ट्रीयल टास्क फोर्स के गठन की बात कही गई है, जो EV ट्रांजिशन से जुड़े सभी नियामक अवरोधों को दूर करेगा।
