किसी भी राष्ट्र के लोकतंत्र को संविधान मजबूत करता है। संविधान किसी भी देश का वह दस्तावेज है जिसमें नियमों व कानून का उल्लेख होता है। संविधान देश के आम नागरिकों में समन्वय, भातृत्व व विश्वास स्थापित करने का कार्य करता है।

देश की संचालन शक्ति को निर्णय लेने की शक्ति का निर्धारण करता है साथ ही उसकी शक्तियों को नियंत्रित भी करता है। राष्ट्र की आकांक्षाओं और उनके लक्ष्य को पूर्ण करने का अवसर प्रदान करता है। संविधान राष्ट्र की मूल पहचान, स्वाभिमान और गौरव को स्थापित करता है। 

सन 2015 से प्रतिवर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अंगीकृत किया था साथ ही मुख्य प्रावधानों को इसी दिन लागू कर दिया गया जिसका उल्लेख संविधान की प्रस्तावना में भी है। इसीलिए 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रथम बार आधिकारिक रूप से संविधान सभा के गठन की मांग की थी।

राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष बनाया गया। संविधान सभा का मुख्य कार्य कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत भारतीय संविधान का निर्माण करना था। इस सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई। भारत की आजादी के बाद संविधान के प्रारूप समिति का गठन 29 अगस्त 1947 को किया गया।

इस समिति के अध्यक्ष डॉ॰ भीमराव अंबेडकर को बनाया गया। इस समिति में अध्यक्ष सहित कुल 7 सदस्य थे। संविधान की मूल प्रति भारतीय संसद के पुस्तकालय में आज भी सुरक्षित है। जिसे सुंदर कैलिग्राफी में हाथ से लिखा गया था। 

हिंदी संस्करण को वसंत कृष्ण वैद्य ने जबकि अंग्रेजी संस्करण को प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने अपनी खूबसूरत लेखनी में लिखा। भारतीय संविधान के निर्माण में कुल समय 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन लगे। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान को लागू किया गया जिसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

भारतीय संविधान अपनी कई विशेषताओं के कारण विशिष्ट है। भारत के मूल संविधान में 395 अनुच्छेद 22 भाग व 8 अनुसूचियां थी। यह विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। भारतीय संविधान का निर्माण करने के लिए संविधान निर्माताओं ने 60 से अधिक देशों के संविधानों का गहनता से अध्ययन किया और वहां से बेहतरीन सिद्धांतों को भारतीय परिस्थितयों के अनुसार संकलित किया।

ब्रिटेन से संसदीय स्वरूप, संसद के विशेषाधिकार, अमेरिका से मूल अधिकार, उपराष्ट्रपति का पद, आयरलैंड से राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, फ्रांस से स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का भाव, ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची, जर्मनी से आपातकाल, दक्षिणी अफ्रीका से संविधान संशोधन प्रक्रिया, भारत सरकार अधिनियम 1935 से राज्यपाल, न्यायपालिका और लोक सेवा आयोग का गठन लिया गया।

भारतीय संविधान भारत को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य बनाती है। देश में सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक न्याय की व्यवस्था करता है। भारतीय संविधान प्रत्येक व्यक्ति को विचारों की अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रदान करता है।

प्रत्येक नागरिक को प्रतिष्ठा और अवसर की समानता उपलब्ध करवाता है। भारतीय संविधान इस दृष्टि से भी अनुपम है क्योंकि यह समय के साथ बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए लचीला भी है। इसमें संशोधन किए जा सकते हैं और साथ ही, देश के मूल सिद्धांतों की रक्षा के लिए कठोर भी है यानी आसानी से बदला नहीं जा सकता। संविधान लागू होने के बाद से इसमें अब तक शताधिक संशोधन किए जा चुके हैं।