क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक श्रम बाजार विरोधाभास से गुजर रहा है। इस स्थिति में भारत के पास वैश्विक रोजगार का केन्द्र बनने का सुनहरा मौका है।भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है लेकिन देश अल्प योग्यता और व्यापक कौशल अंतराल की चुनौतियों का सामना कर रहै है। 

वैश्विक श्रम बाजार में बदलाव के बीच भारत रोजगार का केंद्र बन सकता है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कई देशों में वृद्ध होती आबादी के कारण अर्थव्यवस्थाओं में कुशल श्रमिकों की मांग बढ़ रही है और व्यवसाय डिजिटीलकरण को अपना रहे हैं।

भारतीय श्रम बाजार गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा
हालांकि, क्रिसिल की रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि भारत का श्रम बाजार गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, विशेष रूप से अल्प योग्यता और व्यापक कौशल अंतराल के रूप में। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, भारत में स्नातक पास किए हुए लोगों में से आधे से भी कम को पूरी तरह से रोजगारयोग्य माना जाता है। इसके अलावा, देश की कार्यशील आबादी में केवल 4.4 प्रतिशत ने ही औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

क्रिसिल इंटेलिजेंस का सुझाव 
इससे यह संकेत मिलता है कि विशाल कार्यबल होने के बावजूद, अपर्याप्त कौशल विकास का मुद्दा देश में एक समस्या बन गया है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को अपने कौशल विकास तंत्र में संरचनात्मक कमियों को तत्काल दूर करना होगा। ऐसा करके, देश न केवल घरेलू रोजगार और उत्पादकता में सुधार कर सकता है, बल्कि वैश्विक कौशल की कमी को भी दूर करने में योगदान दे सकता है।

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