भारत को इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में पांच विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार से मेजबान टीम ने टीम इंडिया पर पांच मैचों की सीरीज में 1-0 से बढ़त बना ली है। दूसरा टेस्ट दो जुलाई से बर्मिंघम में शुरू होगा। पहले और दूसरे टेस्ट में लंबा ब्रेक है और उससे पहले टीम इंडिया को गलतियां सुधारने का पूरा मौका मिलेगा। पहले टेस्ट में भारतीय टीम से काफी गलतियां हुईं। कई कैच छूटे और पुछल्ले बल्लेबाजों के रन नहीं बनाने से लक्ष्य भी कम रह गया। गेंदबाजी भी औसत हुई। जसप्रीत बुमराह नहीं चले तो बाकी गेंदबाज प्रभावी नहीं दिखे। आइए जानते हैं लीड्स टेस्ट में टीम इंडिया की हार की पांच बड़ी वजह…

1. दोनों पारियों में भारत के पुछल्ले बल्लेबाज रहे फेल
लीड्स में भारत के शीर्ष पांच बल्लेबाजों ने मिलकर 721 रन बनाए। वहीं, निचले क्रम के छह बल्लेबाज मिलकर कुल 65 रन ही बना सके। शीर्ष पांच और निचले छह के रनों में 656 रन का अंतर है। यह भारत द्वारा अब तक खेले गए टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा अंतर है। भारतीय टीम ने पहली पारी में आखिरी सात विकेट 41 रन पर गंवा दिए थे, जबकि दूसरी पारी में भारतीय टीम ने आखिरी छह विकेट 31 रन पर गंवा दिए। पुछल्ले बल्लेबाजों के नहीं चलने से टीम इंडिया, जो एक वक्त पहली पारी में 520+ रन बनाती दिख रही थी, वह 471 रन पर सिमट गई। वहीं, दूसरी पारी में भी लक्ष्य 400+ रन का हो सकता था, लेकिन पुछल्ले बल्लेबाज विफल रहे और भारतीय टीम कुछ रन कम रह गई। 

2. कैच छोड़ना, इसने जले पर नमक छिड़का
भारतीय टीम की फील्डिंग इस मैच में लचर रही। भारतीय खिलाड़ियों ने दोनों पारियों में कई कैच छोड़े। यशस्वी जायसवाल ने अहम मौकों पर कैच छोड़े। उनसे चार कैच छूटे। इसका अंजाम भारत को हार से चुकाना पड़ा। फील्डिंग को लेकर कई पूर्व क्रिकेटर्स भी टीम इंडिया की आलोचना कर रहे हैं। सुनील गावस्कर से लेकर नवजोत सिद्धू तक ने इसे निचले दर्जे का बताया है। भारतीय टीम को अगर वापसी करनी है, तो फील्डिंग में सुधार करना होगा। भारतीय फील्डर्स ने बेन डकेट, हैरी ब्रूक और क्राउली को कई जीवनदान दिए। दूसरी पारी में जब डकेट 97 रन बनाकर खेल रहे थे तो सिराज की गेंद पर यशस्वी ने एक आसान कैच छोड़ा और डकेट ने भरपूर फायदा उठाते हुए इंग्लैंड की जीत की नींव रखी। इसके अलावा जडेजा और पंत से भी कैच छूटे।

3. बुमराह नहीं चले तो औसत दिखी गेंदबाजी
बुमराह ने पहली पारी में पांच विकेट लिए। उनकी घातक गेंदबाजी ने इंग्लैंड को 465 रन पर समेट दिया और टीम इंडिया को दूसरी पारी में छह रन की बढ़त मिली। हालांकि, दूसरी पारी में बुमराह ने 19 ओवर गेंदबाजी की और 57 रन खर्च किए, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। इंग्लैंड के बल्लेबाजों की रणनीति बुमराह को संभलकर खेलने की और बाकी गेंदबाजों पर प्रहार करने की थी और वह इसमें कामयाब भी हुए। बुमराह दूसरी पारी में नहीं चले तो टीम इंडिया की गेंदबाजी औसत दिखी और बाकी गेंदबाज सिर्फ पांच विकेट निकालने में कामयाब हो पाए। यह इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि बुमराह इस दौरे पर अधिकतम तीन टेस्ट खेलेंगे।

उनके बिना टीम इंडिया को दो और टेस्ट खेलने होंगे। उनके नहीं होने पर कौन उनके जैसा प्रदर्शन कर पाएगा यह देखना अभी बाकी है। बुमराह के अलावा सिराज ने दोनों पारियां मिलाकर 41 ओवर गेंदबाजी की और सिर्फ दो विकेट लिए और वो भी उन्हें पहली पारी में मिले। वहीं, प्रसिद्ध कृष्णा ने भले ही विकेट चटकाए, लेकिन वह काफी महंगे साबित हुए। पहली पारी में प्रसिद्ध ने तीन और दूसरी पारी में दो विकेट लिए, लेकिन दोनों पारियों में उनका इकोनॉमी रेट 6 से ऊपर का रहा। शार्दुल दोनों पारियां मिलाकर दो विकेट ले पाए। पहली पारी में उनका इकोनॉमी रेट 6.30 का रहा था, जबकि दूसरी पारी में 5.10 का रहा। जडेजा दोनों पारियों में इकोनॉमिकल रहे, लेकिन उन्हें सिर्फ एक विकेट मिला।

4. मिले मौके को नहीं भुना पाए करुण और सुदर्शन
करुण को आठ साल बाद भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका मिला, लेकिन वह इस मौके को नहीं भुना पाए। इस टेस्ट से पहले उन्होंने इंडिया-ए के लिए दोहरा शतक जड़ा था। साथ ही घरेलू क्रिकेट में भी खूब रन बनाए थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव उनके चेहरे पर साफ दिखा। पहली पारी में वह दबाव में गलत शॉट खेलकर आउट हुए, जबकि उसकी कोई जरूरत नहीं थी, वहीं दूसरी पारी में वह वोक्स को उनकी ही गेंद पर कैच थमा बैठे। करुण पहली पारी में खाता नहीं खोल सके थे, जबकि दूसरी पारी में 20 रन बना सके। वहीं, सुदर्शन के साथ भी कुछ ऐसा ही रहा। यह बल्लेबाज घरेलू क्रिकेट में खूब रन बनाकर आया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव क्या होता है, यह सुदर्शन को अब पता चला होगा। तीन नंबर की जिम्मेदारी उन्हें मिली, लेकिन वह 0 और 30 रन ही बना सके। इन दोनों के नहीं चलने से भारत बड़ा स्कोर नहीं बना सका।

5. छठे गेंदबाज की कमी खली
भारतीय टीम इस टेस्ट में छह विशेषज्ञ बल्लेबाजों के साथ उतरा। टीम में जडेजा और शार्दुल के रूप में दो गेंदबाजी ऑलराउंडर्स थे। वहीं, तीन विशेषज्ञ तेज गेंदबाज भी थे। हालांकि, बुमराह को छोड़कर जब बाकी गेंदबाजों को मार पड़ी तो उस वक्त भारत के पास कोई एक्स्ट्रा गेंदबाज नहीं था और इसकी कमी टीम इंडिया को खली। वहीं, इंग्लैंड के पास पांच गेंदबाजों के अलावा रूट, ब्रूक और डकेट भी पार्ट टाइम गेंदबाजी कर लेते हैं।