पेट के अलावा पीठ और पैरों की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग करने और रक्त के संचार को ठीक रखने के लिए यह योग असरदार है। आइए जानते हैं नौकासन योग के स्वास्थ्य लाभ और इस आसन को करने का सही तरीका व सावधानियां।
Boat Pose Benefits: योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया है जो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में सुधार लाने के साथ ही बीमारियों से बचाव भी करता है। अधिक प्रभाव पाने के लिए अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेष योग क्रियाएं होती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ के मुताबिक, शरीर को स्वस्थ रखने में लिवर और पाचन अंगों का स्वस्थ रहना आवश्यक माना जाता है। लिवर और पाचन के लिए पौष्टिक और सही आहार का सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही शारीरिक सक्रियता भी जरूरी है। दिनचर्या में योग को शामिल करके पेट के तमाम अंगों को स्वस्थ और फिट रखा जा सकता है।
लिवर, पेट संबंधी समस्याओं और कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए नौकासन योग का अभ्यास लाभकारी माना जाता है। पाचन स्वास्थ्य को बेहतर रखने में भी नौकासन योग मदद करता है।
पेट के अलावा पीठ और पैरों की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग करने और रक्त के संचार को ठीक रखने के लिए यह योग असरदार है। आइए जानते हैं नौकासन योग के स्वास्थ्य लाभ और इस आसन को करने का सही तरीका व सावधानियां।
नौकासन के स्वास्थ्य लाभ
- नौकासन का नियमित अभ्यास पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- इस आसन के अभ्यास से पैर और बांह की मांसपेशियां टोन होती हैं।
- शरीर के निचले हिस्से को मजबूत बनाता है।
- हर्निया से पीड़ित लोगों के लिए यह आसन लाभकारी है।
- पाचन तंत्र में सुधार करता है।
- फेफड़े, लीवर और पेनक्रियाज को मजबूत बनाने में नौकासन का अभ्यास कर सकते हैं।
- पेट के चारों ओर ब्लड और ऑक्सीजन का संचार करता है।
- यह आसन ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने और शुगर लेवल को बनाए रखने में मदद करता है।
- वजन घटाने और पेट की जिद्दी चर्बी को घटाने में नौकासन फायदेमंद है।
नौकासन के अभ्यास का तरीका
स्टेप 1- नौकासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को सीधा फैलाएं और साथ रखें।
स्टेप 2- दोनों हाथों को शरीर के बगल में सीधा रखते हुए गहरी सांस लें।
स्टेप 3- अब सांस छोड़ते हुए छाती और पैरों को जमीन से ऊपर हवा में उठाएं।
स्टेप 4- अपनी बाहों को पैरों की ओर जितना संभव हो खींचे।
स्टेप 5- ध्यान रहें कि इस दौरान आंखें, उंगलियों और पैर की उंगलियां एक सीध में ही होनी चाहिए।
स्टेप 6- इस अवस्था के दौरान पेट की मांसपेशियों के सिकुड़न पर नाभि क्षेत्र में तनाव महसूस होगा।
स्टेप 7- अब इसी मुद्रा में रहते हुए आराम से गहरी सांस लेते रहें।
स्टेप 8- कुछ देर नौकासन की स्थिति में रहें, फिर पहली वाली सामान्य अवस्था में आ जाएं।
नौकासन की सावधानियां
कुछ शारीरिक समस्याएं हैं, जिनमें नौकासन का अभ्यास करने से बचना चाहिए। अगर आप ब्लड प्रेशर, गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन के पीड़ित हैं तो नौकासन का अभ्यास न करें। गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान नौकासन का अभ्यास न करने की सलाह दी जाती है।
रीढ़ की हड्डी की कोई समस्या होने पर भी नौकासन के अभ्यास से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा अस्थमा और हृदय रोग होने पर इस मुद्रा से बचें। योग का अधिकतम लाभ पाने के लिए योग विशेषज्ञ से सलाह के बाद ही आसन करें।
नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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