शरीर को स्वस्थ रखने की बात हो तो यहां संपूर्ण स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। आमतौर पर हम सभी हृदय, पाचन, फेफड़ों को स्वस्थ रखने के बारे में सुनते-पढ़ते और इसे ठीक रखने के उपाय करते रहते हैं पर क्या आप अपनी आंखों और नींद को ठीक रखने पर ध्यान देते हैं? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सभी उम्र के लोग इससे संबंधित समस्याओं का तेजी से शिकार होते जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की दिक्कतें बढ़ी हैं। नींद और आंखों पर भी इसका गंभीर नकारात्मक असर देखा जा रहा है। जिस आदत को इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार पाया गया है, स्क्रीन पर हमारा बढ़ता समय उसमें प्रमुख है।
अगर आप भी अक्सर मोबाइल-लैपटॉप या किसी अन्य प्रकार की स्क्रीन से चिपके रहते हैं तो सावधान हो जाइए, ये आपके लिए कई तरह की समस्याएं बढ़ाने वाली हो सकती है।
स्क्रीन टाइम और इसके नुकसान
स्क्रीन टाइम का मतलब फोन-टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी जैसे स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय से है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होती है, जिनमें मोटापा, आंखों की बीमारी और अनिद्रा शामिल हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह देते हैं, ये मस्तिष्क के विकास में बाधा उत्पन्न करने के साथ कम उम्र में ही क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।
स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी को बहुत नुकसानदायक पाया गया है, जिससे आंखों और मस्तिष्क की समस्याएं बढ़ती हैं। इसके अलावा स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के कारण आपकी शारीरिक गतिविधि भी कम हो जाती है जिससे मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
स्क्रीन टाइम आंखों को कर रहा है कमजोर
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अनुपम सिंह बताते हैं कि स्क्रीन टाइम आंखों की रोशनी कमजोर कर रहा है, इसका असर सभी उम्र के लोगों पर देखा जा रहा है। ओपीडी में 30 प्रतिशत बच्चे इसी शिकायत के साथ पहुंच रहे हैं।
वहीं आई स्पेशलिस्ट डॉ विक्रांत शर्मा ने बताया कि आंखों की समस्या वाले ज्यादातर बच्चों में स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा देखा जा रहा है। इसके कारण कम दिखाई देने, आंखों में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है।
कंप्यूटर पर काम करने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि आप हर 40 से 50 मिनट तक काम करने के बाद 5 से 7 मिनट का ब्रेक लें, ताकि आंखें और शरीर को आराम मिल सके। इस दौरान दूर की चीजों को देखकर अपनी आंखों को आराम दें। मोबाइल पर अनावश्यक रील्स देखने या स्क्रॉल करते रहने की आदत को कम करने की जरूरत है।
नींद की भी बढ़ रही है दिक्कत
स्क्रीन टाइम आंखों के साथ सभी उम्र के लोगों में नींद की भी समस्या बढ़ाते जा रहा है। एक नए अध्ययन में पता चला है कि सोने से पहले एक घंटा स्मार्टफोन, टीवी और कंप्यूटर पर बिताने से अनिद्रा का जोखिम लगभग 60 फीसदी बढ़ सकता है। नॉर्वे में 18-28 वर्ष की आयु के 45 हजार से अधिक छात्रों पर किए गए अध्ययन में यह भी पता चलता है कि इससे नींद का समय भी लगभग आधे घंटे कम हो सकता है।
फ्रंटियर्स इन साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुख्य लेखक गुन्नहिल्ड जॉनसन हेटलैंड ने कहा, स्क्रीन टाइम जितना अधिक होता है, नींद उतनी अधिक प्रभावित होती है। नींद की कमी शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत के लिए समस्याएं बढ़ा देती है।
इन बातों का रखें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्क्रीन टाइम को लेकर कुछ बातों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
- अध्ययनकर्ताओं ने सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या अन्य किसी उपकरण का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है।
- ब्लू-लाइट फिल्टर ऑन करें। रात को किताब पढ़ें या ध्यान करें।
- स्क्रीनटाइम से मायोपिया भी हो सकता है, ये आंखों की गंभीर समस्या है।
- आंखों को स्वस्थ रखने वाले अभ्यास करें, डॉक्टर की सलाह पर स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय चश्मा पहनें।
- योग-मेडिटेशन की मदद से नींद मे सुधार का प्रयास करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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