पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही निवेश पर रिटर्न के लिहाज से तो बेहतर रही, लेकिन दूसरी छमाही ने इस पर पानी फेर दिया। इसके कई कारण रहे हैं। लेकिन उम्मीद है कि कुछ समय में ये सभी पीछे छूट जाएं। ऐसा होता है तो 13 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है। इसका गणित बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट-

शेयर बाजार में अक्तूबर से लेकर मार्च के पहले सप्ताह तक भारी गिरावट रही। अब इसमें थोड़ा सुधार है, क्योंकि जिस वजह से गिरावट हो रही थी, वह वजह खत्म होती दिख रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारी-भरकम बिकवाली की, जिससे बाजार 15 फीसदी तक टूट गया। हालांकि, पिछले छह कारोबारी सत्रों में इन निवेशकों ने 31,000 करोड़ के शेयर खरीदे हैं। अमेरिकी टैरिफ अभी भी अनिश्चितता के भंवर में है। इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। देशों के बीच तनाव भी हैं। अप्रैल में टैरिफ पर बहुत ज्यादा स्पष्टता आएगी। इसके बाद विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार में तेजी से लौटेंगे। देशों के बीच तनाव भी कम होगा। कमोडिटीज की कीमतें घटी हैं और इससे महंगाई भी कम हो रही है। जिससे ब्याज दरें घट रही हैं। ऐसी स्थिति में पूरे वित्त वर्ष में बीएसई सेंसेक्स 10-13 फीसदी तक ऊपर जा सकता है।

एफडी : 7.5 फीसदी ब्याज का मौका
बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी में निवेश करना चाहते हैं तो यह सही समय है, क्योंकि अप्रैल के दूसरे हफ्ते में आरबीआई अपनी बैठक में फिर से रेपो दर घटा सकता है। ऐसे में लोन के साथ एफडी पर भी दरें घटेंगी। अभी बड़े बैंक 7.5 फीसदी ब्याज दे रहे हैं। ऊंचा ब्याज पाने का अब भी समय है। ध्यान रहे कि एफडी अवधि एक साल की हो। हो सकता है उसके बाद ब्याज दरें बढ़ जाएं। ऐसे में आप एक साल के लिए पैसा जमा कराते हैं तो एक साल बाद फिर से उसे ऊंची ब्याज दर पर फिक्स्ड कर सकते हैं।

सोना-चांदी :12 फीसदी के लाभ की उम्मीद
सोना पिछले हफ्ते जहां पहली बार 92,000 रुपये प्रति दस ग्राम के पार चला गया, वहीं चांदी 1.03 लाख रुपये प्रति किलो के पार चली गई। सोना और चांदी ऐसे निवेश के साधन हैं, जो लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने में कामयाब रहे हैं। एक दशक में दोनों का रिटर्न दो अंकों से ज्यादा रहा है। खासकर देशों के बीच तनाव और कोई वैश्विक संकट आने के समय इनकी कीमतें और बढ़ती हैं। कीमतों में हालिया तेजी कई देशों में युद्ध और वैश्विक स्तर कमोडिटीज की कीमतों में वृद्धि के कारण आई है। इस पूरे वित्त वर्ष में इसमें 10-12 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है।

म्यूचुअल फंड  
छह महीने में जिस तरह से बाजार टूटा है, उसका असर म्यूचुअल फंड के रिटर्न पर भी पड़ा है। म्यूचुअल फंड विविधीकरण तरीका अपनाते हैं। यानी 100 रुपये में से 60 रुपये शेयर बाजार, 20 रुपये सरकारी प्रतिभूतियों, 10 रुपये सोना-चांदी, 10 रुपये अन्य सेगमेंट में निवेश करते हैं। ऐसे में जब बाजार गिरता है तो फंड का रिटर्न भी प्रभावित होता है। हालिया गिरावट में फंड की स्कीमों की नेट एसेट वैल्यू यानी एनएवी में अच्छी गिरावट आई है, जिससे यह सस्ते भाव पर मिल रही हैं। अभी सस्ते भाव में एनएवी खरीदते हैं तो जब बाजार चढ़ेगा, इनकी एनएवी बढ़ जाएगी।

निवेश में विविधता तो ज्यादा रिटर्न मिलेगा
ध्यान रखेंं कि निवेश में हमेशा विविधता हो। 100 रुपये को एक ही साधन के बजाय अलग-अलग साधन में लगाएं। इससे एक साधन में घाटा हो रहा है तो दूसरे के रिटर्न से उसकी भरपाई होती है। एसेट अलोकेटर फंड यही काम करता है। यह फंड इन हाउस वैल्यूएशन मॉडल का उपयोग करके इक्विटी, डेट व गोल्ड म्यूचुअल फंड स्कीम/ ईटीएफ में निवेश को गतिशील रूप से समायोजित करता है। तीन साल में इस कैटेगरी के कुछ फंडों का रिटर्न 11.80 फीसदी व पांच साल में 13.69 फीसदी रहा है। – पुनीत वावेजा, पार्टनर, मनीक्राफ्ट फाइनेंशियल सर्विसेस

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