भारत की राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी के संघर्ष, नारी सशक्तिकरण, समाज में नारी के सम्मान को ऊँचाई देने, और भारत के विकास में नारी की भूमिका को उजागर करने वाले उनके कार्यों की प्रशंसा में समर्पित एक कविता🪴🙏🏻

“नारी शक्ति की जीवंत प्रतीक – महामहिम मुर्मू”

आंधियों से जो डरी नहीं,संघर्षों में भी मुस्काई,
उस आदर्श नारी की गाथा, हर दिल में समाई।
द्रौपदी मुर्मू, नाम नहीं बस पहचान है,
हर नारी के स्वाभिमान की उड़ान है।

धरती की बेटी, जनजाति की शान,
सादगी में छिपा एक अद्भुत ज्ञान।
शून्य से शुरू कर, शिखर तक पहुँची,
हर बाधा को अपने हौसलों से जीती

नारी के अधिकारों की जो प्रहरी बनी,
हर बेटी के लिए आशा की किरण बनी।
दिखाया उन्होंने रास्ता
बनो भारत भाग्य विधाता

सम्मान, शिक्षा, सेवा और भक्ति ,
हर रूप में है,नारी शक्ति
भारत के विकास में जो दिशा लाई,
नारी को भी राष्ट्र-निर्माता बनाई।

जनहित में जो उठती उनकी वाणी,
उसमें छिपी होती सबकी कहानी।
संविधान की मर्यादा, जनसेवा की लय,
उनके निर्णयों में दिखे भारत की नई विजय।

हे महामहिम, आप हैं प्रेरणा महान,
हर घर की बेटी अब भरे नयी उड़ान।
नारी सशक्त हो, निर्भय और जागरूक बने
अब भारत 🇮🇳 विकासशील से विकसित बने

                     कवयित्री सुधा राजस्वी मिश्रा 
                       पर्यावरण मित्र संयोजिका       
                             धनबाद झारखण्ड