छावा’ के निर्देशक लक्ष्मण उतेकर ने वेशभूषा संयोजक शीतल इकबाल शर्मा को इस फिल्म के कॉस्ट्यूम डिजाइन करने के लिए चुना। फिल्म ‘छावा’ की कामयाबी के बाद से शीतल को खूब बधाइयां मिल रही हैं।
फिल्म ‘छावा’ के निर्देशक लक्ष्मण उतेकर उन चंद फिल्म निर्देशकों से हैं, जो कला के सामूहिक विकास में यकीन रखते हैं। सामूहिक विकास मतलब टीम को साथ लेकर उनके विकास की कोशिशें करना और इसमें फिर टीम लीडर का विकास हो ही जाता है।
अपने करियर की सबसे बड़ी फिल्म ‘छावा’ के लिए वह चाहते तो किसी भी कॉस्ट्यूम डिजाइनर को अपने साथ ला सकते हैं, लेकिन उन्होंने भरोसा किया अपनी फिल्मों ‘मिमी’ और ‘जरा हटके जरा बचके’ के वेशभूषा संयोजक शीतल इकबाल शर्मा पर और वह भी यही कहते हैं कि टीम को आगे लेकर चलना बहुत जरूरी है, आप टीम को आगे बढ़ाते रहिए, आप आगे खुद ब खुद बढ़ जाएंगे।
फिल्म ‘छावा’ की कामयाबी के बाद से शीतल को खूब बधाइयां मिल रही हैं, उनसे ‘अमर उजाला’ की एक एक्सक्लूसिव मुलाकात।
फिल्म ‘छावा’ पर बात करने से पहले थोड़ी बात आपकी करते हैं, आपने कॉस्ट्यूम डिजाइन कॉलेज में सीखा है या दूसरों के साथ काम करके?
मैं मुंबई से कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की पढ़ाई करने ही ब्रिटेन गया था। वीगन ली से मैंने ग्रेजुएशन किया और फिर फिर पोस्ट-ग्रेजुएशन के लिए लंदन चला गया। ये उन दिनों की बात है जब दुनिया भर में आर्थिक मंदी का पहला झटका आया।
लोगों की नौकरियां जा रही थीं, और मैं नया काम तलाश रहा था। आर्थिक मंदी के कारण लंदन में काम नहीं मिला और मैं 2009 में मुंबई लौट आया। लंदन में पढ़ाई के दौरान मैंने प्राचीन भारतीय कला, फ्रेंच रिवेरा जैसी अलग-अलग आर्ट फॉर्म्स पर रिसर्च की थी। यह रिसर्च हिंदी फिल्मों में बहुत काम आई।