रांची, 21 दिसंबर 2025: झारखंड फिलॉसॉफिकल फोरम (JPF) ने “Philosophical Counselling Via Socio-Philosophical Perspective in Classical Films Down the Ages” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन होटल द प्लेज़, रांची में किया। इस संगोष्ठी में प्रतिष्ठित दार्शनिक, शिक्षाविद् और सिनेमा उत्साही उपस्थित रहे, जिन्होंने दर्शन, समाज और क्लासिकल सिनेमा के परस्पर संबंधों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना से हुआ। समारोह में माननीय अतिथियों को सम्मानित किया गया, जिनमें चेयरपर्सन डॉ. अमृतांशु प्रसाद, मुख्य अतिथि डॉ. अभिषेक कुमार (सहायक प्रोफेसर, मनोचिकित्सा), और विशिष्ट अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल ज्ञान भूषण (सेवानिवृत्त), विजय लक्ष्मी, डॉ. प्रदीप गुप्ता (फोरम के कोषाध्यक्ष), डॉ. प्रमोद कुमार सिंह (फोरम के सह सचिव), डॉ. जेनेट एंड्रयू, डॉ. विनोद राम (रिकॉर्ड इंचार्ज) और प्रोफेसर नीलिमा पाठक शामिल थे।
उद्घाटन सत्र में डॉ. प्रदीप कुमार सिन्हा (स्वागत भाषण), डॉ. जगदीश समंता (विषय परिचय) और डॉ. सरस्वती मिश्र (अध्यक्षीय संबोधन) ने अपने विचार साझा किए। डॉ. अशरफ बिहारी को समर्पित विशेष वीडियो श्रद्धांजलि ने कार्यक्रम को और गहन बनाया।
संगोष्ठी में मदर इंडिया (1957), प्यासा (1957), काग़ज़ के फूल (1959), गोदान (1963) और मन पसंद (1980) जैसी क्लासिकल फिल्मों के चयनित दृश्य दिखाए गए, जिनमें सामाजिक और दार्शनिक पहलुओं को प्रदर्शित किया गया। पेपर प्रस्तुति में लिली टोपनो, दीपिका बिस्वा, विनिता उरांव, प्रिया कुमारी दुबे और मनीषा कुमारी ने भाग लिया।
संगोष्ठी का समापन प्रश्न-उत्तर सत्र, प्रतिभागियों से फीडबैक संग्रह, प्रमाण पत्र वितरण और फोरम की आधिकारिक वेबसाइट तथा शोध पत्रिका की शुरुआत के साथ हुआ। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. विनय कुमार पांडे ने किया तथा डॉ. सविता मिश्रा (फोरम की उपाध्यक्ष) ने समापन भाषण देते हुए सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और सहयोगी कर्मचारियों का धन्यवाद किया।
इस आयोजन ने सिद्ध किया कि सिनेमा समाज का दर्पण है और दार्शनिक परामर्श का प्रभावशाली माध्यम भी है, जिसने शिक्षाविदों और विद्यार्थियों में विचार और संवाद को प्रेरित किया।




