लेरिन्जाइटिस ऐसी समस्या है जिसके लक्षण तो सामान्य फ्लू के संक्रमण की तरह होते हैं पर ये कुछ समय के लिए आपकी आवाज भी छीन सकती है। लगातार आवाज बैठे रहना कभी-कभी अधिक गंभीर अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति का संकेत हो सकता है।

मौसम बदलने के साथ सर्दी-खांसी और जुकाम की दिक्कत होना काफी सामान्य है, आमतौर पर इसके लिए इन्फ्लूएंजा वायरस के संक्रमण को प्रमुख कारण माना जाता रहा है। कुछ दिनों में ये संक्रमण अपने आप ही या फिर सामान्य दवाओं के साथ ठीक हो जाता है। पर सूखी खांसी और गले में बने रहने वाले दर्द को हर बार हल्के में लेना ठीक नहीं है। इसी तरह के लक्षण वाली कुछ स्थितियां आपकी आवाज भी छीन सकती हैं।

लेरिन्जाइटिस ऐसी ही एक समस्या है जिसके लक्षण तो सामान्य फ्लू के संक्रमण की तरह होते हैं पर ये कुछ समय के लिए आपकी आवाज भी छीन सकती है। लेरिन्जाइटिस आपके वॉयस बॉक्स (स्वरयंत्र) में सूजन की एक स्थिति है। इसके कारण खांसी, गले में दर्द के साथ कुछ लोगों की आवाज कर्कश हो जाती है, जबकि कुछ लोगों में इसके कारण आवाज चले जाने की भी समस्या देखी जाती रही है।

लेरिन्जाइटिस की समस्या के बारे में जानिए

हमारे गले में मौजूद वॉयस बॉक्स के अंदर वोकल कॉर्ड्स होते हैं। ये वोकल कॉर्ड खुलते और बंद होते रहते हैं, इसमें होने वाले कंपन के माध्यम से ध्वनियां उत्पन्न होती हैं। जब इस वॉयस बॉक्स में सूजन आ जाती है तो इसके कारण आपकी आवाज बदल जाती है या कर्कश होने लगती है। कुछ स्थितियों में इसके कारण आपकी आवाज जा भी सकती है।

लेरिन्जाइटिस आमतौर पर अल्पकालिक (कम समय तक रहने वाली समस्या) समस्या होती है पर ये दीर्घकालिक (क्रॉनिक) भी हो सकती है। अधिकांश मामलों में ये दिक्कत अस्थायी वायरल संक्रमण के कारण होती है और गंभीर नहीं होती। हालांकि लगातार आवाज बैठे रहना कभी-कभी अधिक गंभीर अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति का संकेत हो सकता है।

क्या है इस समस्या का कारण?

लेरिन्जाइटिस के ज्यादातर मामले अस्थायी होते हैं या फिर जिस बीमारी के कारण ये दिक्कत होती है उसके ठीक होने के बाद ये भी ठीक हो जाते हैं।

  • वायरल संक्रमण जो सर्दी का कारण बनते हैं, उसके कारण भी कुछ लोगों को ऐसी दिक्कत हो सकती है। जबकि कुछ लोगों को वोकल स्ट्रेन, यानी ज्यादा चिल्लाने या बहुत अधिक बोलने के कारण लेरिन्जाइटिस की समस्या हो सकती है।
  • यदि आवाज बैठने की ये दिक्कत तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहती है तो इसे क्रॉनिक लेरिन्जाइटिस के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर एलर्जी या सांस के माध्यम से रासायनिक धुआं लेने के कारण ये दिक्कत हो सकती है। 
  • छाती या गर्दन में चोट, तंत्रिका तंत्र से संबंधित विकार या कैंसर जैसी स्थितियों में भी आपको लेरिन्जाइटिस के लक्षण हो सकते हैं।

कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं हो गए हैं इसका शिकार?

ज्यादातर मामलों में लेरिन्जाइटिस के लक्षण कुछ हफ्तों से भी कम समय तक रहते हैं और आसानी से ठीक हो जाते हैं। इसके संकेतों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है।

  • गला बैठना या आवाज का पूरी तरह से गायब हो जाना। 
  • गले में खराश महसूस होना
  • अक्सर गला सूखना
  • सूखी खांसी की समस्या बने रहना।

कैसे करें इससे बचाव?

लेरिन्जाइटिस या फिर आवाज गायब होने की समस्या से बचाव के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।

  • धूम्रपान और सकेंड हैंड स्मोकिंग से बचें। सिगरेट का धुआं आपके गले को सुखा देता है जो आपके स्वरयंत्रों में जलन भी पैदा कर सकता है।
  • शराब और कैफीन का सेवन कम से कम करें। इनसे आपका शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है।
  • तरल पदार्थ आपके गले में जमा बलगम को पतला और आसानी से साफ करने में मदद करते हैं। इसलिए खूब पानी पीते रहें।
  • आहार में स्वस्थ खाद्य पदार्थ शामिल करें जैसे फल-सब्जियां और साबुत अनाज आदि।
  • अपने हाथों को बार-बार धोएं और ऐसे लोगों के संपर्क में आने से बचें जिन्हें सर्दी-जुकाम जैसे ऊपरी श्वसन संक्रमण है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

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